निर्देशित ध्यान

निर्देशित ध्यान

सचेत जागरूकता

ध्यान सुनकर ज़्यादातर लोगों के मन में मन को चुप कराने की तस्वीर आती है। असल में बात सीधी है: आप बैठते हैं, ध्यान को एक जगह टिकाते हैं, और जब वह भटक जाए तो उसे वापस ले आते हैं। बस इतना ही। मुश्किल है इसे नियमित रूप से करना।

यहाँ दो रास्ते हैं। संगीत वाले अभ्यास में समय और संगीत आप चुनते हैं और बाक़ी सत्र अपने आप चलाते हैं। निर्देशित वीडियो में एक आवाज़ आपको क़दम-क़दम पर ले चलती है: बॉडी स्कैन, योग निद्रा और मैत्री (मेत्ता) ध्यान जैसे सत्र हैं। नए हों तो निर्देशित वीडियो से शुरू करना आम तौर पर आसान लगता है।

क्या उम्मीद रखें

शुरुआती दिनों में कुछ बड़ा नहीं होता। ज़्यादातर लोग पहले यह देखते हैं कि वे कितना सोचते हैं, और इसे अपनी असफलता समझ लेते हैं। ऐसा नहीं है; देख पाना ही अभ्यास है।

शोध भी नपे-तुले ढंग से बोलते हैं। 2014 में JAMA Internal Medicine में छपी एक समीक्षा ने 47 अध्ययनों और 3500 से ज़्यादा प्रतिभागियों को परखा; उसमें पाया गया कि माइंडफुलनेस-आधारित कार्यक्रम चिंता, अवसाद के लक्षणों और दर्द में मध्यम सुधार से जुड़े थे। नींद, ध्यान या वज़न जैसे विषयों पर प्रमाण कमज़ोर थे। यानी ध्यान कोई चमत्कार नहीं; नियमित करने पर कुछ लोगों को फ़ायदा देने वाली एक आदत है।

कौन-सा तरीक़ा चुनें

शुरू करने से पहले

ये कुछ मिनट मेरे अपने हैं। मुझे कहीं पहुँचना नहीं है; बस यहाँ बैठना है।

कैसे करें

  1. आराम से, पर सजग रह सकें ऐसे बैठें। कुर्सी भी चलेगी: पीठ सीधी और कंधे ढीले।
  2. तरीक़ा चुनें: संगीत के साथ खुद, या निर्देशित वीडियो।
  3. आँखें बंद करें या नज़र नीचे ज़मीन की ओर कर लें। पहली तीन साँसों में जानबूझकर धीमे हो जाएँ।
  4. ध्यान भटके तो खुद पर नाराज़ न हों। इसे देखें और अपनी साँस या गाइड की आवाज़ पर लौट आएँ।
  5. समय पूरा होने पर तुरंत न उठें। कुछ साँसें और बैठें, फिर आँखें खोलें।

किन बातों का ध्यान रखें

मक़सद मन को ख़ाली करना नहीं है। विचार आएँगे; उन्हें देखकर छोड़ देना काफ़ी है।

अगर आप गहरे शोक, किसी आघात या घबराहट के दौर से गुज़र रहे हैं, तो लंबे मौन सत्र कभी-कभी भारी पड़ सकते हैं। उन्हें छोटा रखें, आँखें खुली रखकर बैठें और ज़रूरत हो तो किसी विशेषज्ञ की मदद लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दिन में कितने मिनट करूँ?
जितना आप निभा सकें। ज़्यादातर लोगों के लिए 5 या 10 मिनट से शुरू करना और कुछ हफ़्तों बाद चाहें तो बढ़ाना सबसे व्यावहारिक रास्ता है।
मुझे नींद आने लगती है, क्या मुझसे कुछ ग़लत हो रहा है?
नहीं, यह बहुत आम है। आँखें अधखुली रखें, पीठ टिकाकर न बैठें, या अभ्यास को दिन के किसी ज़्यादा ताज़ा वक़्त पर ले जाएँ।
क्या पालथी मारकर बैठना ज़रूरी है?
नहीं। आप कुर्सी पर, गद्दी पर या लेटकर भी कर सकते हैं। ज़रूरी यह है कि आप आराम में और सजग रहें।

ध्यान दें: यहाँ के अभ्यास आराम करने और अपने पास लौटने के लिए हैं; ये चिकित्सकीय सलाह, निदान या इलाज नहीं हैं। अगर आपको कोई स्वास्थ्य समस्या है या आप दवा लेते हैं, तो आपके डॉक्टर की बात ही मान्य है। अभ्यास के दौरान अगर आपको बुरा लगे तो रुक जाएँ।

अभी शुरू करें →