एकाग्रता

एकाग्रता

फोकस और इच्छाशक्ति

ध्यान की शक्ति मांसपेशी की तरह काम करती है: इस्तेमाल से बढ़ती है और छोड़ने से बिखर जाती है। इस अभ्यास में आप स्क्रीन के एक बिंदु पर देखते हैं और मन जब कहीं और चला जाए तो उसे वापस लाते हैं। सुनने में आसान लगता है; पहले दो मिनट में ही पता चल जाएगा कि यह कितना कठिन है।

योग परंपरा में इस विधि को त्राटक कहते हैं। पंद्रहवीं सदी का ग्रंथ Hatha Yoga Pradipika इसे छह शुद्धि क्रियाओं में गिनता है। असल में यह दीपक या मोमबत्ती की लौ को देखकर की जाती है; यहाँ लौ की जगह चार अलग-अलग दृश्य हैं।

चार तरह के केंद्र

क्या उम्मीद रखें

कुछ हफ़्ते नियमित करने वाले अक्सर कहते हैं कि काम शुरू करते समय फ़ोन की ओर हाथ बढ़ाने की इच्छा उन्हें पहले दिखने लगती है। देख लेना रोकने का आधा काम है।

त्राटक पर हुए छोटे अध्ययन ध्यान की जाँचों में सुधार बताते हैं, लेकिन नमूने छोटे हैं और नतीजे पक्के नहीं। इसे दिमाग़ बढ़ाने की तकनीक नहीं, बल्कि ध्यान को साधने की एक सादी कसरत समझें।

शुरू करने से पहले

अपना ध्यान कहाँ रखना है, यह तय करना मेरे हाथ में है। वह भटके तो उसे वापस लाना है; बस इतना ही।

कैसे करें

  1. पीठ सीधी करके बैठें। स्क्रीन आँखों की सीध में और एक हाथ की दूरी पर हो।
  2. एक केंद्र और समय चुनें। पहली बार 5 मिनट काफ़ी हैं।
  3. नज़र केंद्र पर टिकाएँ। पलकें कम झपकाएँ, पर खुद पर ज़ोर न डालें।
  4. विचार आए तो उससे उलझें नहीं। उसे देखें और नज़र को केंद्र पर लौटा लाएँ।
  5. समय पूरा होने पर आँखें बंद करें और थोड़ी देर अँधेरे में आराम दें।

किन बातों का ध्यान रखें

आँखें जलें या पानी आए तो उन्हें बंद करें, आराम दें, फिर आगे बढ़ें। दर्द होने तक ज़ोर देने का कोई फ़ायदा नहीं।

घूमते और हिलते दृश्य कुछ लोगों में चक्कर ला सकते हैं। अगर आपको मिर्गी का इतिहास है या रोशनी से संवेदनशीलता है तो यह अभ्यास छोड़ दें।

कॉन्टैक्ट लेंस लगाते हैं तो आँखें जल्दी सूखती हैं; समय छोटा रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या पलकें न झपकाना ज़रूरी है?
नहीं। परंपरागत वर्णन में बिना पलक झपकाए देखा जाता है, पर स्क्रीन पर इसके लिए ज़ोर लगाना आँखों को थका देता है। आराम से पलकें झपकाएँ; नज़र केंद्र पर रहे, इतना काफ़ी है।
क्या पढ़ाई से पहले करना फ़ायदेमंद है?
कई लोग काम शुरू करने से पहले 5 मिनट का सत्र एक सेतु की तरह इस्तेमाल करते हैं। आज़माएँ; अच्छा लगे तो जारी रखें।
किस केंद्र से शुरू करूँ?
श्वास बिंदु से। यह साँस का साथ देता है और मन को दूसरा सहारा दे देता है।

ध्यान दें: यहाँ के अभ्यास आराम करने और अपने पास लौटने के लिए हैं; ये चिकित्सकीय सलाह, निदान या इलाज नहीं हैं। अगर आपको कोई स्वास्थ्य समस्या है या आप दवा लेते हैं, तो आपके डॉक्टर की बात ही मान्य है। अभ्यास के दौरान अगर आपको बुरा लगे तो रुक जाएँ।

अभी शुरू करें →