हर दिन एक चक्र, एक फ़्रीक्वेंसी
सात दिन, सात विषय। हर दिन आप एक चक्र के विषय को देखते हैं और उससे जोड़े गए सॉल्फ़ेजियो सुर को 10 से 20 मिनट सुनते हैं। मूल से शुरू होती है, सहस्रार पर ख़त्म।
चक्रों को आप एक नक़्शे की तरह सोच सकते हैं: भरोसा, आनंद, संकल्प, प्रेम, अभिव्यक्ति, अंतर्ज्ञान और एकत्व जैसे विषयों को शरीर के ख़ास स्थानों से जोड़कर कहने वाली एक पुरानी भाषा। यात्रा आपको इन विषयों को क्रम से एक-एक दिन देने का मौक़ा देती है।
चक्रों का वर्णन भारतीय योग और तंत्र ग्रंथों में मिलता है; उनकी संख्या ग्रंथ-ग्रंथ में अलग है। आज जानी जाने वाली सात की व्यवस्था मुख्य रूप से सोलहवीं सदी में लिखे गए षट्चक्र निरूपण (Shat-chakra-nirupana) पर आधारित है, और यह पश्चिम तक 1919 में Arthur Avalon के अनुवाद "The Serpent Power" के ज़रिए पहुँची।
चक्रों को ख़ास आवृत्तियों से जोड़ना शास्त्रीय ग्रंथों में नहीं है; यह बीसवीं सदी के अंत में उभरी एक व्याख्या है। इस यात्रा में हम उस जोड़ को एक ढाँचे की तरह इस्तेमाल करते हैं। चक्र शारीरिक अंग नहीं हैं; यहाँ कुछ नापा या इलाज नहीं किया जा रहा।
एक हफ़्ते की नियमित सुनने और सोचने की आदत। हर दिन एक ही वक़्त पर कुछ मिनट रुकना, ज़्यादातर लोगों के लिए पूरे काम का सबसे क़ीमती हिस्सा होता है। दिन के विषय पर ख़ुद से एक सवाल पूछना और कुछ पंक्तियाँ लिखना अनुभव को गहरा करता है।
दिनों का लगातार होना ज़रूरी नहीं, पर क्रम बनाए रखने की सलाह है, यानी मूल से सहस्रार की ओर।
विषय को दिमाग़ में सुलझाने की कोशिश न करें। देखें कि आप उसे शरीर में कहाँ महसूस करते हैं।
ध्यान दें: यहाँ के अभ्यास आराम करने और अपने पास लौटने के लिए हैं; ये चिकित्सकीय सलाह, निदान या इलाज नहीं हैं। अगर आपको कोई स्वास्थ्य समस्या है या आप दवा लेते हैं, तो आपके डॉक्टर की बात ही मान्य है। अभ्यास के दौरान अगर आपको बुरा लगे तो रुक जाएँ।